बाबा साहब की 125वीं जयंती प्रतिस्पर्धी उत्सव के रूप में

ख़ुशी की बात है कि संविधान के रचनाकार डॉ० भीम राव रामजी अम्बेडकर के 125 वें जयंती पर वो लोग भी  जो कभी बाबा साहब का पुतला जलाया करते थे आज बाबा साहब को अपने से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहे हैI

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सबसे पहले बाबा साहब के 125वीं जयंती पर मेरी तरफ से आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें

jai bhim

………..जय भीम…………

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बाबा साहब का वो समय आज हम कहानियों के रूप में पढ़ कर दंग रह जाते है जब उन्होंने समाज की यातनाये एवम अपमान झेला क्या बीती होगी उनपर जब वो बारिस्टर इन लॉ की पढाई करके अपने देश लौटे और यातनाएं, गालियां, अपमान और न जाने कितनी सारी अटकलें झेला सिर्फ इसलिए के वो समाज द्वारा मनगढन्त सामाजिक उंच नीच की सीढी बनाने वालों ने उनका स्थान निचले सीढियों पर समझा I

छुआ छुत से पीड़ित लोग एवम जात पात की जंज़ीरों में ज़करी हुई समाज बाबा साहब को बहुत प्रभावित किया I ज्यों ज्यों समाज ने उनका अपमान किया उनके इरादे और भी द्रिढ होते गएँ और उन्होंने हार न मानते हुए भारतीय समाज को एक ऐसा योगदान दिया जिसकी वजह से हमारे समाज में मनगढन्त सामाजिक उंच नीच की सीढियों को समतल होना पड़ा एवम जात पात की जंजीरों से मुक्ति का नया रास्ता मिला I

भारतीय संविधान की रचना बाबा साहब के अनेक योगदानो में से एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी योगदान है जिसे संजो कर रखना ही बाबा साहब का सम्मान है I

आज जिस जोर शोर से बाबा साहब को सब राजनीतिक दल अपने से जोड़ने में लगे है उनके पीछे की मंशा भी जनता खूब जानती है I मगर सवाल ये है कि साल में एक बार बाबा साहब के बारे में चींख चींख कर बोलना, बड़ी बड़ी सभाएं करना, एक दो लुभावने योजनावों का घोषणा कर देना ही बाबा साहब को सम्मान देना है क्या ?  

जब बाबा साहब ने संसद की भरी सभा में किसी काम का श्रय लेने से मना कर दिया था तो आज बाबा साहब के नाम पर दलित समाज को लुभाने की किस तरह की कोशिश की जा रही है इस से दलित समाज भी भली भांति अवगत है और सचेत भी I अगर कोई भी राजनीतिक दल बाबा साहब को सच में अपने से जोड़ना चाहता है तो उनके बताये रास्ते पर चले, उन्होंने जिस भारत का सपना देखा था उसको आगे बढ़ाये I अगर सरकारें एवं राजनीतिक दल सच में बाबा साहब के बताये रास्ते पर चलने लगे

                              तो फिर

  • कोई रोहित वेमुला संस्थागत हत्या की आहुति नहीं चढ़ेगा,

  • किसी इखलाक को जंगली भेडियों का शिकार नहीं होना पड़ेगा,

  • सिखों के कातिलों और गुजरात के दंगाईयो को शाबबासी के बजाये सलान्खो के पीछे रहना पड़ेगा,

  • बाबरी मस्जिद पर राजनीती चमकाने के बजाये सुलझाने के दिशा में प्रयास की जाएगी,

  • भारी मात्रा में किसानो के आत्म हत्या के कारण को समझ कर उनका नीवारण किया जाता,

  • दबे, कुचले एवं आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को सताया नहीं जाता, और न ही धर्म के नाम पर दंगा करा कर वोट बटोरा जाता I

    बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि बाबा साहब कि जयंती के अवसर पर बड़ी बड़ी सभाएं, बड़ी बड़ी बातें, नई योजनाओ की घोसणा, लुभावनी पोस्टरें ये सब सिर्फ दिखावा मात्र ही तो है शायद जो आने वाले राज्य के चुनावों पर केन्द्रित हैं I

कास प्रतिस्पर्धा बाबा साहब के विचारों पर चलने की होती, बाबा साहब के सपनो को आगे बढाने की होती एवं बाबा साहब के दिए संविधान पर चलने की होती I

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            मेरी क़लम से…………

रज़ा क़ादिर 

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Twitter:-       https://twitter.com/quadirsahab

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One thought on “बाबा साहब की 125वीं जयंती प्रतिस्पर्धी उत्सव के रूप में

  1. Aaj bhi hamare samaj me aise log hai jo naam se jyada title par focus karte hai kunki wo hamara cast janna chahte hai . mai sirf ye kahna chata hu ki aaj bhi jaat paat tarah se hamare samaj se khatam nahi hua hai .

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