महात्मा गाँधी एक विचारधारा है जिसे ख़तम करना असंभव हैI

राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गाँधी क्या सच में उतना सम्मान के पात्र है जितना उनको सम्मान दिया गया है क्या वो देश प्रेमी थे या देशद्रोहीI क्या उनके चरित्र पे उठाये गए सवाल बे बुन्याद नहींI

में जनता हूँ कि मेरा कद इतना ऊँचा नहीं कि में इन सवालो को उठाने की साहस करूI मगर ये सवाल मेरे नहीं और हो भी नहीं सकते क्यों कि में अपने देश से अधिक प्रेम करता हूँI ये सवाल उनके है जिनकी बयांन बाज़िया हम आये दिन हर न्यूज़ चैनेल और यू टयूब में सुन्नते रहते है और सिर्फ इतना कह कर भूल जाते है कि ये तो पागल हो गया हैI

इन सवालों पर में अपनी राय रखने से पहले मै भी चंद सवाल करना चाहता हूँ उन लोगों से जो वो सब सवाल उठाते है जिसका ज़िक्र मैंने ऊपर कियाI

मेरे कुछ सवाल ये है :

  • जिन आधार पर गाँधी जी को देशद्रोही कहा जाता है वो आधार क्या है?
  • जिन प्रिस्थितियों में गाँधी जी ने देशद्रोही या देश्हितैसी (आप के नज़र में जो हो) निर्णय लिए उन परिस्थितियों में आप होते तो क्या करते?
  • जो लोग ये सब सवाल उठा रहे है उनका क्या योगदान है देश को आज़ाद कराने में?
  • वे लोग इस भारतवर्ष को कैसा बनाना चाहते है अमन का पैग़ाम देने वाला देश या जाती या धर्म के नाम पे हर रोज़ लहू से होली खेलने वाला देश?

इन चार सवालों का जवाब अगर वे सच्चे मन से प्रयाप्त तथ्य के आधार पे अगर ढूंढने की कोशिश करेंगे तो मुझे उम्मीद है कि ऐसी बेतुका बयान बाज़िया करना बंद करदेंगेI एक तरफ सरकार गाँधी जी के नाम पे लुभावने स्कीम चलाती है और उनके चश्मे को ब्रांड कि तरह प्रयोग करती है और दूसरी तरफ अपने ही लोगों से ऐसी बयानबाज़ी करवाती हैI

एक तरफ तो बाल ठाकरे साहब और आज़म खान साहब को फेसबुक में भी कोई कुछ कह दे तो आई० टी० एक्ट और नजाने क्या क्या IPC की धाराएँ लगा दी जाती हैI दूसरी तरफ जिसे पूरा देश राष्ट्रपिता मानती ही नहीं बल्कि आस्था भी रखती हैI जिसे देश ही नहीं सम्पूर्ण विश्व अमन का मसीहा के नाम से जानती है उन्हें अपने ही मात्रभूमि में कुछ लोग खुले भेड़ियों कि तरह अपनी जंगली आवाज़ से उनके आत्मा को हर एक पल कष्ट देते हैI

ऐसी दोहरी निति की मंशा रखने वाले लोग देश को किस ओर ले जाना चाहते है इसका अंदाज़ा शायद ही किसी को न होI

भारत की ख़ूबसूरती इसकी धर्मनिरपेक्षता है बहुत सी संस्कृति और भाषाओँ का समावेश हैI इस धर्मनिरपेक्षता की वकालत करने वाले को अगर कोई देशद्रोही कहे तो ये मानसिक असंतुलन का परिणाम हैI अगर किसी को इस देश के धर्मनिरपेक्ष होने से आपत्ति है तो ये विचार मानवीय विचार धाराओं से परे हैI किसी बगीचे की खूबसूरती तब बढती है जब उसमे भिन्न-भिन्न प्रकार के फूल हो और सभी फूल समान प्रकार से खिलते हुए दीखेंI संक्षेप में कहूँ तो गाँधी जी ने भी भारत को बहुत सारे धर्मों, भाषाओं एवम जातियों को समानता से विकास करने और अमन से रहने की वकालत की है और भारत को भिन्न भिन्न धर्मों, भाषाओं एवम जातियों का बगीचा बनाने के लिए खुद खाद बन गए ताकि भारत अमन का पैगाम देने वाला देश बना रहेI

जो लोग गाँधी जी पे तर्क वितर्क करते है और उन्हें भला बुरा कहते है उनको ये जान लेना चाहिए के गाँधी जी कोई व्यक्ति मात्र ही नहीं जिसे ख़त्म करने के बाद ख़त्म हो जाये वो एक बहुत बड़ी और पूरी दुनिया में पसंद कि जाने वाली मजबूत विचार धाराओं में से एक विचारधारा है जिसे ख़तम करना असंभव हैI

With best wishes and tons of gratitude​
 Raza Quadir 
(MBA – HR & FINANCE)
Mb:- +91-9692330642
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VOICE OF HEART

“The insider pain,

which I cant explain,

“Life means move on,

which demands stardom,

“How I make life understand,

I also have some feelings &  demands,

“The depth is sea & limit is sky,

I am on the earth & wishes so high,

“Please time wait for a while,

I also want to go with you a lot of mile….

 
Raza Quadir
(MBA – HR & FINANCE)
Mb:- +91-9692330642
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आम आदमी पार्टी …तूफानों से खेलना शौक़

आम आदमी पार्टी जिसे लोगों ने हमेशा अपने सरआँखों पे रखा हैI लोग जिसे एक स्वछ राजनीति का मसीहा समझते हैI अचानक क्या ऐसा हो गया कि जो लोग आम जनता से किये गए वादे और उनके छोटे-छोटे सपनो को पूरा करने के लिए हमेशा अपने आप को तत्पर रखते थे वही लोग अब आपस में ही भीड़ गए, एक दुसरे पर कटाक्ष और शब्दों की तीर बाज़ी करनी शुरू कर दीI फेसबुक और सोशल मीडिया तो कुरुक्षेत्र की भूमि बन कर रह गयी हैI जो लोग पहले एक रास्ते एक ही मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे थे वही लोग अब कई रास्तो की ओर बिखर गए हैंI कई लोगों ने तो चलना और आगे बढ़ना तो दूर की बात है उन्होंने अपना रास्ता भी अलग कर लिया है I

पार्टी के अन्दर जो उथल पुथल आया इससे शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो अपरिचित होगाI मै यह ज़रूरी नहीं समझता के जो हुआ उसकी व्याख्या यहाँ करूँI मगर हाँ चन्द शब्दों में मै अपनी राय रखना ज़रूरी समझता हूँI

­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­मिटाके जिसने अपनी हस्ती को तुझे सहारा दिया

शर्म है तुझपे, तूने उसी को रुशवा किया

मत भूल के तू अधुरा है  उनके बिना

बस तू इतना बता दे के तूने क्यों ऐसा किया

शायद अब आप मेरी मत को समझ गए होंगे पूरी देश की जनता ने आम आदमी पार्टी को अपने कंधे पे बैठा कर पुरे देश ही नहीं बल्कि विदेशो का भी भ्रमण कराया बड़ी शर्म की बात है कि आज उसी आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है वो भी इसलिए के जिन लोगो पे उनका इतना भरोषा था वही लोग उन्हें बता भी नहीं रहे है कि क्या कुछ ऐसा हुआ कि पार्टी में तूफान आ गया आम जनता चीख़-चीख़ कर कह रही है कि आप मुझे बताएं क्या हुआ है| मै हमेशा के तरह पार्टी के दुःख को अपना दुःख समझ कर इसपर  मरहम लगाऊंगा और जल्द से जल्द इस दुःख को सुख में बदलने की कोशिश करूँगा मगर आज न तो कोई उस बेचारे आम आदमी की आवाज़ को सुन रहा है और न ही उसके दुःख को कोई समझ रहा है कल तक तो सब आम आदमी पार्टी में उसी आम आदमी के तरह सीधे- सादे ओर मै (so-called “AHENKAR”) की भावना से परे थे अब शायद उन सब में भी मै (so-called “AHENKAR”) की भावना का समावेश हो गया है और सब एक दुसरे से बड़े हो गए है| मेरी समझ में तो बस एक ही बात सुझता है जो पार्टी में उठे इस तूफान को रोकने में सफल हो सकता है वो है कार्यकर्ताओं की राय ली जाये| अगर आपके मन कोई सुझाव है तो आप भी साझा कीजिए|

With best wishes and tons of gratitude​

 
Raza Quadir
(MBA – HR & FINANCE)
Mb:- +91-9692330642
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